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Thursday, December 29, 2011

Copper Pyrite, स्वर्ण माक्षीक भस्म

स्वर्ण माक्षीक तांबे का खनीज होता है यह ताप्तिज़ नदी के किनारे पर सिथत पर्वतीय खानों से प्राप्त होता है , अत: इसे तापीज्य भी कहते हैं । सोने जैसा रंग होने के कारण इसे स्वर्ण माक्षिक भी कहते हैं । 
स्वर्ण माक्षिक मारण विधि-- शुद्ध माक्षिक लेकर सम्भाग गंधक लेकर निम्बु के रस मे खरल करते हैं टिकिया बना कर सुखा लेते है उसके बात टिकिया को शराब सम्मुट करके गज पुट मे फ़ूक देते हैं  ८ पुट देने से स्वर्ण माक्षिक भस्म तैयार हो जाती है ।
गुण कर्म---   मधुर, तिक्त कषाय, कटु विपाक, शीतवीर्य, योगवाही, त्रिदोष हर,, पाण्डु नाशक, जरा नाशक, वृष्य, लघु, रसायन. 
  1. Swarn Makshika is beneficial in
    anemia.
    -This is also found to be beneficial
    in jaundice.
    -Swarn Makshika is also found to
    be beneficial in Kapha and Pitta
    Roga’s.
    -This is brings about increase in
    red blood cell count.
  2.  it was primarily
    priscribed in low TLC,
    so,
    along wid
    s-makshika chuna plz add,
    Praval panchamrit,
    kalmegha navyas rasa,
    and amritarista.
  3. .also add in combinations of bleeding piles treatment & rakta pitta..very effective.
  4.  MY Clinical experience with Swarnamakshika bhasma:
    It is a valuable medicine in treating Pancreatitis.
    I cured some cases of sub acute pancreatitis with the following combination
    Swarnamakshika bhasma 15grms+Pravala pisti 15 grams+30 grams +Amla churna 30 grams +Guduchi satwa30 grams
    1.5 grams twice daily before food with cow ghee.
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