इसका कोमल क्षूप तुलसी के पौधे की तरह का होता पत्ते भी लगभग तुलसी के तरह के होते हैं ।उत्तर भारत मे लगभग हर जगह यह सितम्बर के बाद हर जगह दिखाई देता है। इसके कुछ गुलाबी या बैगंनी रंग के फ़ुल आते हैं ।
आयुर्वेदिक गुण--
यह लघु, रुक्ष, रस मे तिक्त विपाक मे कटु और वीर्य मे उष्ण होता है।
प्रभाव से यह स्मोहित करने वाला और ज्वर नाशक होता है।
ज्वरं हन्ति शिरोबद्धा सहदेवी जटा यथा ॥
कफ़वातशामक, ज्वरहर, शोथहर, वेदनास्थापन कृमिघ्न आदि वर्गों मे इसको रखा गया है ।
मुख्य रुप से इसका प्रयोग विषम ज्वर मे होता है , इसमे इसका स्वरस १० से २० मि. लि. थोड़ा गरम करके देते हैं ।
तिक्त और लघु होने से यह चर्म विकारो और प्रमेह मे भी उपयोगी है ।
चित्र प्राप्ति स्थान -- राणा एग्री. फ़ार्म जिला करनाल