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Saturday, January 1, 2011

Vitex negundo, Five-leaved Chaste,निर्गुण्डी, सम्हालू


वातहर द्रव्यों मे यह विशेष स्थान रखती है। इसका बहुवर्षायु कठिन  क्षुप होता है । इसके पत्र त्रिपत्रक या पंच पत्रक , दन्तुर भालाकार होते हैं ।  पुष्प मंजरियों मे आते है और नीलाभ रंग के होते हैं ।
यह लगभग हर जगह मिल जाती है।
आचार्यों ने इसको विषघ्न, क्रिमिघ्न, और सुरसादि गण मे रखा है , आधुनिक द्र्व्यगुण मे इसको वेदना स्थापन 
गण मे रखा है ।
आयुर्वेदिक गुण कर्म --
                लघु, रुक्ष, विपाक मे कटु, रस मे कटु तिक्त, वीर्य मे उष्ण , कफ़वात शामक 
मै अपनी आयुर्वेदशाला मे इसको निम्नलिखित रोगों मे प्रयोग करता हुँ --
  • शिरोविरेचन के लिये इसके स्वरस का प्रयोग विशेष कर पीनस रोग मे 
  • बीजों का प्रयोग  कफ़ के अवरोध को दूर करने के लिये विशेष कर फ़ेलोपियन ट्युब की रुकावट के लिये
  • विभिन्न दुष्ट व्रणों के रोपण के लिये इससे सिद्ध तैल बहुत ही कारगर है 
  • वातरोगों यथा आमवात संधिवात रोग मे इसके क्वाथ से स्थानिक वाष्प स्वेदन और आभ्यांतर प्रयोग 
प्रयोज्यांग-- पत्र , मूल, स्वरस । मात्रा  मूलत्वक चुर्ण- ३ ग्रा, बीज चुर्ण - ३ ग्रा . 
चित्र प्राप्ति स्थान -- करनाल ( हरियाणा ) 
 आप सभी को नव वर्ष की शुभकामनाएँ 


Monday, August 23, 2010

Crataeva nurvala, वरूण, बरणा

यह बहुवर्षायु वृक्ष होता है जो लगभग हर जगह मिल जाता है , उत्तर भारत मे इसका वृक्षखेतो मे कही कही मिल जाता है , इसके सफ़ेद फ़ूल आते है और पत्र त्रिपत्रक होते है बेल की तरह ।

जनवरी से अप्रैल तक यह वृक्ष निश्पत्र रहता है । इसके फ़ल निम्बु के आकर के होते हैं।
यह अत्यधिक उष्ण होता है और प्रभाव से अश्मरी भेदन का काम करता है । इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग अंतरविदर्धि और ग्रंथि मे भी किया जाता है ।
यह लघु रुक्ष, तिक्त कषाय कटु होने के कारण शरीर मे स्रोतशोधन का काम करता है ।
मै इसको अपनी आयुर्वेदशाला मे अश्मरी भेदन और शोथ के लिये करता हँ ।
वातरक्त, गण्डमाला, बस्तिशुल, मुत्रमार्ग संक्रमण अश्मरी, की यह विशिष्टऔषधि है ।

चित्रप्राप्ति स्थान == राणा एग्रिकल्चर फ़ार्म जिला करनाल हरियाणा
प्रयोज्यांग -- त्वक

Monday, March 29, 2010

Euphorbia thymifolia , नागार्जुनी, दुग्धिका, छोटी दुद्धी


आयुर्वेदिक गुण--
गुण- गुरु, रुक्ष,तीक्ष्ण,
रस- कटु, तिक्त , मधुर

विवरण-- यह छोटा प्रसरणशील, भूमि पर फ़ैलने वाला, रोमश,बिन्दी जैसे पत्ते वाला, रंग हरा व लाली लिये हुए हरा. होता है ।

मुख्य रूप से कफ़वात शामक होता है ।

मै अपनी आयुर्वेदशाला मे इसको निम्नलिखित व्याधियों मे प्रयोग करता हुँ---
  1. रक्तज अर्श( बवासीर ) की वर्धमान अवस्था मे बहुत ही उपयोगी , इसके कल्क को लेने से मांसाकुर सुख कर रक्तज अर्श को समाप्त कर देते हैं ।
  2. स्त्रियों के बन्ध्यत्व मे बहुत ही उपयोगी, इस पोधे मे यह विशेष गुण होता है की यह स्रोतोवरोध जन्य स्थिति मे बहुत ही अच्छा कार्य करती है , ट्युब ब्लोकेज मे यह उपयोगी द्रव्य है ।
  3. मधुमेह मे हल्दी और वासा स्वरस के साथ बहुत ही अच्छा प्रभाव दिखाती है ।

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