Showing posts with label gout. Show all posts
Showing posts with label gout. Show all posts

Monday, August 23, 2010

Crataeva nurvala, वरूण, बरणा

यह बहुवर्षायु वृक्ष होता है जो लगभग हर जगह मिल जाता है , उत्तर भारत मे इसका वृक्षखेतो मे कही कही मिल जाता है , इसके सफ़ेद फ़ूल आते है और पत्र त्रिपत्रक होते है बेल की तरह ।

जनवरी से अप्रैल तक यह वृक्ष निश्पत्र रहता है । इसके फ़ल निम्बु के आकर के होते हैं।
यह अत्यधिक उष्ण होता है और प्रभाव से अश्मरी भेदन का काम करता है । इसके अतिरिक्त इसका प्रयोग अंतरविदर्धि और ग्रंथि मे भी किया जाता है ।
यह लघु रुक्ष, तिक्त कषाय कटु होने के कारण शरीर मे स्रोतशोधन का काम करता है ।
मै इसको अपनी आयुर्वेदशाला मे अश्मरी भेदन और शोथ के लिये करता हँ ।
वातरक्त, गण्डमाला, बस्तिशुल, मुत्रमार्ग संक्रमण अश्मरी, की यह विशिष्टऔषधि है ।

चित्रप्राप्ति स्थान == राणा एग्रिकल्चर फ़ार्म जिला करनाल हरियाणा
प्रयोज्यांग -- त्वक

Sunday, March 28, 2010

Asteracantha longifolia , कोकिलाक्ष, तालमाखना


इसका वर्षायु क्षुप होता है , जो तालाबों और नहरो के किनारो पर मिलता है , तने की गाँठो पर काँटे होते है. पत्ते लम्बे होते है और गाँठो पर गुच्छे मे आते है ।

आयुर्वेद्कि गुण- गुरु, स्निग्ध, पिच्छिल, रस- मधुर, विपाक- मधुर, वीर्य- शीत, वातपित्त शामक

प्रयोज्यांग- मूल, पाँचांग, क्षार, बीज चुर्ण

दोषकर्म- शीतल, मूत्रजनन, शुक्रशोधन, स्तय्न्यजनन, संतर्पण, यकृतशोथ नाशक, बल्य, एवं वृष्य ।

धातुपौष्टिक चुर्ण मे यह एक घटक के रूप मे होता है ।

मै अपनी आयुर्वेदशाल मे इसको निम्नलिखत रोगों मे प्रयोग करता हुँ--

  1. पित्त की थैली की पथरी(Cholecystitis) मे यह बहुत ही उपयोगी है , क्वाथ का प्रयोग करें ।
  2. वातरक्त(Gout) और शोथ युक्त वातरक्त मे
  3. अश्मरी मे क्षार का प्रयोग
  4. वाजीकरण के लिये केंवाच बीज चुर्ण समान मात्रा मे कोकिलाक्ष बीज चुर्ण के साथ
  5. उत्तम गर्भाशय शामक (uterine sedative ) |

Trusted Ayurvedic Treatment Since 2004 – Safe, Herbal, and Effective for All!

Trusted Ayurvedic Treatment Since 2004 – Safe, Herbal, and Effective for All! Looking for a natural, safe, and effective solution for chroni...