Pages

Sunday, March 28, 2010

Asteracantha longifolia , कोकिलाक्ष, तालमाखना


इसका वर्षायु क्षुप होता है , जो तालाबों और नहरो के किनारो पर मिलता है , तने की गाँठो पर काँटे होते है. पत्ते लम्बे होते है और गाँठो पर गुच्छे मे आते है ।

आयुर्वेद्कि गुण- गुरु, स्निग्ध, पिच्छिल, रस- मधुर, विपाक- मधुर, वीर्य- शीत, वातपित्त शामक

प्रयोज्यांग- मूल, पाँचांग, क्षार, बीज चुर्ण

दोषकर्म- शीतल, मूत्रजनन, शुक्रशोधन, स्तय्न्यजनन, संतर्पण, यकृतशोथ नाशक, बल्य, एवं वृष्य ।

धातुपौष्टिक चुर्ण मे यह एक घटक के रूप मे होता है ।

मै अपनी आयुर्वेदशाल मे इसको निम्नलिखत रोगों मे प्रयोग करता हुँ--

  1. पित्त की थैली की पथरी(Cholecystitis) मे यह बहुत ही उपयोगी है , क्वाथ का प्रयोग करें ।
  2. वातरक्त(Gout) और शोथ युक्त वातरक्त मे
  3. अश्मरी मे क्षार का प्रयोग
  4. वाजीकरण के लिये केंवाच बीज चुर्ण समान मात्रा मे कोकिलाक्ष बीज चुर्ण के साथ
  5. उत्तम गर्भाशय शामक (uterine sedative ) |
Post a Comment